पावर स्टार' से 'माननीय' बनने की राह जब मां भवानी का आशीर्वाद लेकर विधान परिषद के लिए निकले पवन सिंह
पटना/रोहतास
कहते हैं राजनीति में धैर्य की परीक्षा सबसे बड़ी परीक्षा होती है। जिसने समय के थपेड़ों को हंसकर झेल लिया, तकदीर एक दिन उसके सामने खुद रास्ता खोल देती है। भोजपुरी सिनेमा के 'पावर स्टार' पवन सिंह के साथ भी आज कुछ ऐसा ही हुआ। आज, यानी 8 जून को बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव के लिए पवन सिंह ने भाजपा उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।
यह सिर्फ एक पर्चा दाखिला नहीं था, बल्कि एक कलाकार के जनसेवक बनने के सफर की एक भावुक और नई शुरुआत थी।
नामांकन से पहले 'मां भवानी' की चौखट पर झुका सिर
पवन सिंह भले ही आज लाखों दिलों पर राज करते हों, लेकिन आज सुबह उनका एक अलग ही रूप देखने को मिला। नामांकन के लिए पटना रवाना होने से पहले पवन सिंह रोहतास के दिनारा स्थित प्रसिद्ध भालुनी भवानी देवी मंदिर पहुंचे।
सफेद कुर्ते-पायजामे और गले में मां की चुनरी लपेटे जब पवन सिंह ने मां भवानी के चरणों में सिर झुकाया, तो वहां मौजूद हर शख्स की आंखें खुशी से चमक उठीं। उन्होंने बड़ी सादगी से पूजा-अर्चना की और बिहार की जनता की सेवा के लिए शक्ति मांगी। मंदिर परिसर में अपने चहेते कलाकार को देखने के लिए प्रशंसकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। पवन सिंह ने भी किसी को निराश नहीं किया, हाथ जोड़कर सबका अभिवादन स्वीकार किया और बड़ों का आशीर्वाद लिया।
बीजेपी मेरी मां जैसी है भावुक हुए पवन सिंह
नामांकन प्रक्रिया के दौरान बिहार विधानसभा में पवन सिंह का वही पुराना निराला अंदाज देखने को मिला, लेकिन इस बार उसमें एक परिपक्वता और जिम्मेदारी की झलक थी।
बीते शनिवार को जब उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और भाजपा नेताओं से मुलाकात की थी, तब मीडिया से बात करते हुए वे काफी भावुक नजर आए। पवन सिंह ने कहा
पार्टी ने मुझ पर जो भरोसा जताया है, मैं उसे अपनी पूरी निष्ठा और ईमानदारी से निभाऊंगा। बीजेपी मेरे लिए मां जैसी है। राजनीति में मेरा आने का मकसद सिर्फ और सिर्फ जनसेवा है। जनता की उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए मैं अपनी जान लगा दूंगा।
काराकाट की हार से विधान परिषद तक का सफर धैर्य का मीठा फल
पवन सिंह के लिए यह मौका बेहद खास है। साल 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने काराकाट सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ा था। उस चुनाव में भले ही उन्हें हार का सामना करना पड़ा हो, लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा, बल्कि बिहार की मिट्टी से जुड़े रहे।
पिछले विधानसभा चुनाव में उन्होंने एनडीए के लिए जमकर पसीना बहाया और रैलियां कीं। राजनीति के पंडित मान रहे हैं कि आज भाजपा ने उन्हें जो एमएलसी का टिकट दिया है, वह उनके इसी धैर्य, वफादारी और जनता के प्रति उनके जुड़ाव का इनाम है।
विधानसभा का गणित पवन सिंह की जीत तय
संख्या बल के हिसाब से पवन सिंह का विधान परिषद जाना अब पूरी तरह तय माना जा रहा है। बिहार विधानसभा में एनडीए के पास पर्याप्त विधायकों का समर्थन है, जिससे भाजपा के चारों उम्मीदवारों (पवन सिंह, संजय मयूख, अनिल ठाकुर और शीला प्रजापति) की जीत में कोई अड़चन नहीं दिख रही है। 18 जून को होने वाले मतदान से पहले ही समर्थकों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया है।
बिहार की आवाज अब सदन में गूंजेगी
एक छोटे से गांव से निकलकर गायकी के दम पर दुनिया भर में नाम कमाने वाले पवन सिंह अब बिहार की सबसे बड़ी पंचायत (विधान परिषद) में बैठेंगे। फैंस और बिहार की जनता को उम्मीद है कि जिस तरह उन्होंने अपनी कला से बिहार का नाम रोशन किया, उसी तरह अब वे सदन में बिहार के युवाओं, किसानों और दबे-कुचले लोगों की आवाज बनकर उभरेंगे।
बिहार सोच की टीम की तरफ से पवन सिंह को इस नए सफर के लिए ढेर सारी शुभकामनाएं!


